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सच सुनने से लोग ना जाने क्यों कतराते है, तारीफ़ चाहे झूठी भी क्यों न हो सुनकर लोग खूब मुस्कुराते है, श्रेष्ठता संस्कार से मिलती है, परंतु सिद्ध व्यवहार से होती है ज़िंदगियां दो होती हैं, एक जो हम हर दिन जीते हैं, दूसरी जो हम हर दिन जीना चाहते हैं, इन्हीं दोनों के बीच में · XDL