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वाह मुफ्ती साब वाह, मैं ही नहीं पूरी मुस्लिम बिरादरी आप जैसे उस्तादों की शुक्रगुजार है की आप क़ौम के ऐसे संजीदा मसलो पे बात करते है अगर आप जैसी शख़्सियत ना होती तो हमारी क़ौम की खवातीन और हजरात गुमराही तलब कर लेते। अल्लाह आपको आख़िरत में आला मक़ाम अताह फ़रमाये। आमीन 🤲 · XDL