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धर्म केवल भाषणों में नहीं, बल्कि हमारे रोज़मर्रा के व्यवहार, अनुशासन और सभी उपासना पद्धतियों के प्रति सम्मान में झलकना चाहिए। - डॉ मोहन भागवत जी · XDL