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जाना किधर था, न जाने कहां बढ़ रहा हूॅं दूसरों की किस्मत लिखनी थी खुद की लकीरें पढ़ रहा हूॅं गुस्सा सबसे हूॅं पर खुद से लड़ रहा हूॅं हासिल तो नहीं किया कुछ फिर क्यों खोने से डर रहा हूॅं इन धड़कनों पर मत जाओ मगर अंदर मर चुका हूॅं "🩶 · XDL