दिल्ली किसी के बाप की नहीं, सबकी है। जंतर-मंतर किसी एक दल की जागीर नहीं, हर नागरिक के लोकतांत्रिक विरोध का अधिकार है। सत्ता आती-जाती रहती है, लेकिन लोकतंत्र और नागरिक अधिकार स्थायी हैं। आज जो सवाल दबाए जा रहे हैं, उनका जवाब लोकतांत्रिक तरीके से देना ही होगा। इंकलाब ज़िंदाबाद
@गुरु प्रसाद यादव, लखनऊ
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