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विपत्ति में, विरोध में अडिग रहो, अटल रहो, विषम समय के चक्र में भी साहसी प्रबल रहो। तपा है जो जला है जो चमक उसी में आई है, समस्त ताप-तम में भी बढ़े चलो सफल रहो। बस एक लक्ष्य साध कर गगन की ओर उड़ चलो, घटा घिरी अटूट हो मगर सदा सबल रहो। ~ रामधारी सिंह दिनकर 🏵️ · XDL