XDLXDL
“मैं चाहता हूं ऐसी जगह जाकर रहूं, जहां मुझे कोई कुछ पूछे ना. अब यह इससे बड़ी कोफ़्त हो रही है यार हमारे इर्दगिर्द जो चलता है ना वो, बड़ी तकलीफ होती है अब. ये साफा पहना है तो ये सिख है. ये कोई हिंदू है. मैं जाट हूं. ये ब्राह्मण है. दलित है. ऐसे थे नहीं हम लोग. अच्छे थे. जैसे भी · XDL