एक कचौड़ी दो समोसा, इन मर्दों का क्या भरोसा एक सुट्टा दो चाय, मर्द जात हाय-हाय। शर्म नहीं मर्दों में, औरत क्यों है पर्दों में। नारी अपने आप की, नहीं किसी के बाप की। तोड़ के रख दो वो समाज, नारी जिसमें बंधी है आज।
एक कचौड़ी दो समोसा, इन मर्दों का क्या भरोसा एक सुट्टा दो चाय, मर्द जात हाय-हाय। शर्म नहीं मर्दों में, औरत क्यों है पर्दों में। नारी अपने आप की, नहीं किसी के बाप की। तोड़ के रख दो वो समाज, नारी जिसमें बंधी है आज। · XDL
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