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मैं अज़ल से बन्दा-ए-इश्क हूँ मुझे ज़ोहद-ओ-कुफ्र का ग़म नहीं मेरे सर को दर तेरा मिल गया मुझे अब तलाश-ए-हरम नहीं मेरी बंदगी है वो बंदगी जो ब-कैद-ए-दैर-ओ-हरम नहीं मेरा इक नज़र तुम्हें देखना बखुदा नमाज़ से कम नहीं🤌♥️ · XDL