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तुम्हें मैंने वह सब दिया जो मेरे पास था अपना समर्पण,अपना प्रेम,अपना विश्वास,अपना समय, अपने सपने.... सब कुछ।बदले में कभी कुछ नहीं माँगा।बस इतनी-सी चाह थी... कि जब दुनिया के झमेलों से टूटकर तुम्हारे पास आऊँ,तो तुम मुझे चुपचाप सुन लो।उस वक्त मेरे सही-गलत का हिसाब मत करो,तर्क मत दो.. · XDL