♨️लोग..औरत को फ़क़त जिस्म समझ लेते हैं,,रूह भी होती है उस में..ये कहाँ सोचते हैं...रूह क्या होती है..इस से उन्हें मतलब हीं नहीं,,वो तो बस तन के तक़ाज़ों का कहा मानते हैं... ...रूह मर जाती है तो जिस्म है चलती हुई लाश,,इस हक़ीक़त को समझते हैं..न पहचानते हैं... ...कितनी सदियों से
@rituraj singh
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