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सदा शिव सर्वदा शिव जहाँ न पुण्य है न पाप न सुख और न ही दुःख बस केवल आत्मानंद है। चिदानंद रूप शिवोऽहं शिवोऽहं मैं ही शिव हूँ। न मैं कोई मंत्र हूँ न तीर्थ न वेद और न यज्ञ मैं केवल चेतना का रूप हूँ। · XDL