अध्यापक को ग़ुस्सा आना स्वाभाविक हैं… कोई बड़ी बात नहीं है… अध्यापक का डाँटना भी स्वाभाविक है… इसमें भी कोई बड़ी बात नहीं है… लेकिन जो अध्यापक ग़ुस्से में अपनी बोली और अपने कृत्यों पर क़ाबू नहीं रख सकता… वो अध्यापक कहलाने के लायक़ नहीं है… ग़ुस्सा तो इस विडियो में भी
@kapil bishnoi
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