नीति नहीं, नीयत नहीं... परिवार बिना, जाना कहां? जब देश के लिए न कोई स्पष्ट नीति हो और न सेवा की नीयत, तब राजनीति सिर्फ एक ही परिवार की परिक्रमा और राजकुमार को ताज पहनाने का सर्कस बनकर रह जाती है! घोटालों का भारी बोझ पीठ पर लादे, बदलाव का झूठा नकाब पहनकर जनता को छलने की यह नाकाम
@BJP
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