🏔🍁✍️ बदलते मौसम - अकल्पनीय प्रस्थान आँखें तो रोज़ भीगती हैं.. तुम्हारे जाने का ग़म अब भी है। मगर सबसे गहरा घाव तुम्हारा जाना नहीं.. तुम्हारा यूँ बदल जाना है। कुछ प्रश्न.. उत्तर नहीं माँगते, बस उम्र भर ये सोचते हैं कि.. जिसे अपना माना..वो इतना अजनबी आख़िर कैसे हो जाता है। 🍂
@𝕬𝖚𝖙𝖚𝖒𝖓
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