भारत के शिक्षण संस्थानों में आज़ादी के 80 साल बाद भी SC, ST और OBC समुदायों का प्रतिनिधित्व उन्हें मिले न्यूनतम आरक्षण के आधे के बराबर भी नहीं है। तथाकथित प्रगतिशील माने जाने वाले संस्थान JNU में OBC और आदिवासी समुदाय से एक भी प्रोफेसर नहीं है। मुंबई स्थित टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ
@Santosh Yadav, Ph.D.
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