सिवान के “संतोष सिंह” के लिए संवेदना, लेकिन उनके कृत्य सजा के योग्य है. आज संतोष सिंह के प्रति ब्राम्हण व अन्य सवर्णों कि आवाज देखकर आंखो में आश्रू आ गये मेरे.. क्या यह क्षत्रियों के लिए आवाज उठा रहे..? फिर उसी बिहार में जब मधुबनी व मलमलिया में जब ब्राम्हण व भूमिहार सवर्णों ने
@गहड़वाल साहब
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