दमन की दीवारें चाहे कितनी ऊँची हों, जनता की आवाज़ उनसे ऊँची होगी। ज़ुल्म के साये चाहे जितने गहरे हों, सच की मशाल फिर भी रोशन होगी। हम न डरेंगे, न झुकेंगे, अपने हक़ के लिए आवाज़ उठाते रहेंगे। · XDL
दमन की दीवारें चाहे कितनी ऊँची हों, जनता की आवाज़ उनसे ऊँची होगी। ज़ुल्म के साये चाहे जितने गहरे हों, सच की मशाल फिर भी रोशन होगी। हम न डरेंगे, न झुकेंगे, अपने हक़ के लिए आवाज़ उठाते रहेंगे।
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