मनुष्य को प्रेम की आवश्यकता इसलिए नहीं होती कि वह अकेला है, बल्कि इसलिए होती है कि उसके भीतर अनगिनत भावनाएँ होती हैं, जिन्हें सुनने के लिए कोई एक हृदय चाहिए। जैसे नदी को समुद्र, चाँद को आकाश और शब्द को अर्थ चाहिए, वैसे ही मनुष्य को मनुष्य चाहिए।"प्रेम के रूप में..❤️🧡
@Aniyariya Suresh
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