तरसती हुई आँखों में ,, (: तेरी स्मृतियों का उजास रहता है :) हर साँस के मौन स्पंदन में , तेरे होने का आभास रहता है...!! आत्मविस्मृति ऐसी कि ,, [-स्वयं की सुध भी खो जाती है-] निराशा के गहन अँधेरों में भी , तेरी प्रतीक्षा दीप-सी जलती रहती है...!! तू आए या न आए ,, यह हृदय कहाँ
@༺ दिव्या ༻
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