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तुम होते तो कहती, कुछ दर्द अपना कर लो, अब तुम नहीं हो… तो किससे कहूँ, ठहरो। दूर हो तुम, पर याद बहुत आते हो, भीड़ में भी अक्सर तुम्हें ही ढूँढती हूँ। काश, फ़ासले मिट जाते, और तुम सामने होते, मैं कुछ कहती भी नहीं… बस तुम्हारे पास बैठी होती। · XDL