जानते हो... तुम मुझे कैसे लगते हो ? ब्रह्मांड ,, क्षितिज में एक तारा... कल्पना और सत्य के अंतराल मे बिखरे हुए कोई सीमा ही नहीं है... अंतहीन ,, एक छोर मिलता है तो दूसरा खो जाता है... बस इतना ही..... अब तुम कहो ,, मैं तुम्हे कैसी लगती हूँ ?? #माधव ♥️
@༺ दिव्या ༻
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